Class 10 · Hindi · Chapter 12 · NCERT Class 10 Hindi – Sparsh Bhag 2

अब कहाँ दूसरे के दुख से दुखी होने वाले कक्षा 10 नोट्स

मुफ़्त: पूरा माइंड मैप और अध्याय के पहले 4 भाग। बाकी 4 भाग मुफ़्त अकाउंट से।

माइंड मैप

पूरे अध्याय की मुख्य बातें एक नज़र में।

अब कहाँ दूसरे के दुख से दुखी होने वाले

निदा फ़ाज़ली का यह पाठ प्रकृति के प्रति मनुष्य की बढ़ती संवेदनहीनता और प्राचीन काल की करुणा के बीच के अंतर को दर्शाता है।

  1. प्राचीन करुणा के उदाहरण

    धार्मिक और ऐतिहासिक कथाओं के माध्यम से छोटे जीवों के प्रति संवेदनशीलता का चित्रण।

    • महात्मा सुलेमान — चींटियों के भय को समझकर उन्हें सुरक्षा का आश्वासन दिया और स्वयं को सबके लिए 'मुहब्बत' बताया।
    • शेख अयाज़ के पिता — एक च्योंटे को 'घर वाला' मानकर उसे वापस कुएँ पर छोड़ने गए ताकि वह बेघर न रहे।
    • पैगंबर नूह — घायल कुत्ते को दुत्कारने पर जीवन भर रोते रहे; 'नूह' नाम को उनके पश्चाताप से जोड़ा गया है।
  2. प्रकृति का असंतुलन

    मानवीय लालच और हस्तक्षेप के कारण पर्यावरण पर पड़ने वाले विनाशकारी प्रभाव।

    • बढ़ती आबादी का दबाव — जंगलों की कटाई और समुद्र पर अतिक्रमण से अन्य जीवों के प्राकृतिक आवास छिन गए हैं।
    • प्रकृति का रौद्र रूप — असमय वर्षा और तूफान; बंबई के तूफान में तीन बड़े जहाजों का खिलौनों की तरह बिखरना।
  3. पारिवारिक संस्कार

    लेखक की माँ के माध्यम से प्रकृति के साथ सह-अस्तित्व और संवेदनशीलता की शिक्षा।

    • प्रकृति के प्रति अनुशासन — सूरज ढलने पर पत्ते न तोड़ना और दरिया को सलाम करना जैसे धार्मिक और नैतिक संस्कार।
    • माँ का पश्चाताप — अनजाने में कबूतर का अंडा टूटने पर पूरे दिन का रोज़ा रखना और खुदा से माफी माँगना।
  4. आधुनिक संवेदनहीनता

    वर्तमान युग में मनुष्य का अपने स्वार्थ के लिए अन्य जीवों के प्रति कठोर व्यवहार।

    • पक्षियों का पलायन — बस्तियों के कारण पक्षी बेघर होकर अब इंसानों के घरों में 'डेरा' डालने को मजबूर हैं।
    • बंद खिड़कियाँ और उदासी — जाली लगने के बाद कबूतर बाहर खामोश और उदास बैठते हैं; संवेदनशीलता का अभाव।
  5. दार्शनिक एवं नैतिक बोध

    सभी जीवों की समानता और जीवन की साझी विरासत का संदेश।

    • मिट्टी की समानता — सभी जीव अंततः मिट्टी में मिल जाते हैं; मिट्टी नश्वर शरीर और साझी प्रकृति का प्रतीक है।
    • साझा संपत्ति — धरती केवल मनुष्यों की नहीं, बल्कि ईश्वर द्वारा बनाए गए सभी जीवधारियों की साझा विरासत है।

अध्याय के नोट्स

निदा फ़ाज़ली द्वारा लिखित यह पाठ मनुष्य की बढ़ती स्वार्थपरता और प्रकृति के प्रति उसकी संवेदनहीनता को दर्शाता है। विभिन्न ऐतिहासिक और धार्मिक प्रसंगों के माध्यम से लेखक ने जीव-जंतुओं के प्रति करुणा और सह-अस्तित्व के महत्व को समझाया है।

प्रकृति और मनुष्य का बदलता संबंध

लेखक पाठ की शुरुआत में यह स्पष्ट करते हैं कि यह धरती केवल मनुष्यों की नहीं, बल्कि उन सभी जीवधारियों की है जिन्हें ईश्वर ने जन्म दिया है।

कुदरत (प्रकृति) ने इस धरती को सभी जीवों के लिए साझा संपत्ति के रूप में बनाया था। प्रारंभ में मनुष्य, पशु-पक्षी, नदियाँ और पर्वत सभी एक परिवार की तरह मिल-जुलकर रहते थे। लेकिन मनुष्य ने अपनी बुद्धि का उपयोग करके धीरे-धीरे पूरी धरती पर अपना एकाधिकार जमा लिया और अन्य जीवों को उनके प्राकृतिक आवासों से बेदखल कर दिया।

आज स्थिति यह है कि मनुष्य न केवल अन्य प्रजातियों के प्रति संवेदनहीन हो गया है, बल्कि वह अपनी ही जाति के सुख-दुख की भी चिंता नहीं करता। लेखक पाठकों को अपने आसपास के लोगों के व्यवहार को देखने और इस पाठ के माध्यम से अपनी संवेदनाओं को पुनः जागृत करने का आह्वान करते हैं।

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प्रश्न

लेखक के अनुसार धरती पर किसका अधिकार है?

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महात्मा सुलेमान और चींटियों का प्रसंग

बाइबिल और कुरान में वर्णित सुलेमान (सोलोमेन) की कथा के माध्यम से लेखक ने एक आदर्श शासक की करुणा को दर्शाया है।

पाठ में सुलेमान से जुड़ी एक धार्मिक कथा आती है। उन्हें पशु-पक्षियों की भाषा समझने वाला राजा बताया गया है। सेना के घोड़ों की आवाज सुनकर चींटियाँ डरती हैं। यह कथा छोटे जीवों के प्रति करुणा समझाने के लिए दी गई है।

सुलेमान ने चींटियों की घबराहट को समझा और रुककर उनसे कहा कि वे डरें नहीं, क्योंकि खुदा ने उन्हें सबका रखवाला बनाया है। उन्होंने स्वयं को सबके लिए 'मुहब्बत' बताया। चींटियों ने उनके लिए दुआ की और वे आगे बढ़ गए। यह प्रसंग सिखाता है कि एक शक्तिशाली व्यक्ति को छोटे से छोटे जीव के प्रति भी दयालु होना चाहिए।

सुलेमान और चींटियों का संवाद

  1. 1

    लश्कर का आगमन

    सुलेमान अपनी सेना के साथ रास्ते से गुजर रहे थे।

  2. 2

    चींटियों का भय

    घोड़ों की टापों की आवाज़ सुनकर चींटियाँ बिलों की ओर भागीं।

  3. 3

    सुलेमान का आश्वासन

    सुलेमान ने कहा कि वे किसी के लिए मुसीबत नहीं, बल्कि रक्षक हैं।

  4. 4

    दुआ और प्रस्थान

    चींटियों ने दुआ दी और सुलेमान अपनी मंजिल की ओर बढ़ गए।

यह क्रम सुलेमान की संवेदनशीलता और जीवों के प्रति उनके प्रेम को दर्शाता है।

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सुलेमान ने चींटियों से क्या कहा?

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NCERT reference: chapter PDF page 3.

शेख अयाज़ के पिता की करुणा

सिंधी कवि शेख अयाज़ ने अपनी आत्मकथा में अपने पिता से जुड़ी एक मर्मस्पर्शी घटना का वर्णन किया है।

एक दिन शेख अयाज़ के पिता कुएँ से नहाकर लौटे। जब वे भोजन करने बैठे, तो उनकी नज़र अपनी बाजू पर रेंगते हुए एक काले च्योंटे (बड़ी चींटी) पर पड़ी। वे तुरंत भोजन छोड़कर खड़े हो गए। जब उनकी पत्नी ने पूछा कि क्या भोजन अच्छा नहीं लगा, तो उन्होंने उत्तर दिया कि उन्होंने एक 'घर वाले' को बेघर कर दिया है।

वे उस च्योंटे को वापस कुएँ पर छोड़ने गए ताकि वह अपने घर पहुँच सके। यह घटना दर्शाती है कि पहले के लोग एक छोटे से कीड़े के प्रति भी इतने संवेदनशील थे कि उसे उसके घर से दूर करना उन्हें पाप लगता था। लेखक यहाँ 'घर वाले' शब्द का प्रयोग च्योंटे के लिए करके उसे मनुष्य के समान ही सम्मान देते हैं।

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प्रश्न

शेख अयाज़ के पिता भोजन छोड़कर क्यों उठ गए?

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NCERT reference: chapter PDF page 4.

पैगंबर नूह और घायल कुत्ता

लेखक नूह के प्रसंग के माध्यम से यह बताते हैं कि ईश्वर की बनाई हर रचना का अपना महत्व है और किसी का अपमान नहीं करना चाहिए।

पाठ में नूह की धार्मिक कथा सुनाई गई है। इसमें घायल कुत्ते को दुत्कारने पर हुए पश्चाताप से उनके लगातार रोने और “नूह” कहलाने को जोड़ा गया है। यह लेखक द्वारा प्रस्तुत कथा है, नाम की वैज्ञानिक या ऐतिहासिक व्युत्पत्ति का दावा नहीं।

कुत्ते ने उन्हें उत्तर दिया कि न तो वह अपनी मर्जी से कुत्ता है और न ही नूह अपनी पसंद से इंसान हैं; हम सबको बनाने वाला एक ही ईश्वर है। यह सुनकर नूह को अपनी गलती का अहसास हुआ और वे पश्चाताप में उम्र भर रोते रहे। महाभारत में भी युधिष्ठिर के साथ अंत तक जाने वाला कुत्ता प्रतीकात्मक रूप से वफादारी और साथ का प्रतीक है।

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प्रश्न

नूह को 'नूह' के नाम से क्यों याद किया जाता है?

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आगे का अध्याय

अब कहाँ दूसरे के दुख से दुखी होने वाले — बाकी अध्याय मुफ़्त में पढ़ें

  1. Locked: 1. प्रकृति का असंतुलन और विनाश
  2. Locked: 2. लेखक की माँ की करुणा और पश्चाताप
  3. Locked: 3. आधुनिक युग और संवेदनहीनता
  4. Locked: 4. उत्तर-लेखन कला: एक उदाहरण

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