Class 10 · Hindi · Chapter 7 · NCERT Class 10 Hindi – Kshitij Bhag 2

नेताजी का चश्मा कक्षा 10 नोट्स

मुफ़्त: पूरा माइंड मैप और अध्याय के पहले 4 भाग। बाकी 4 भाग मुफ़्त अकाउंट से।

माइंड मैप

पूरे अध्याय की मुख्य बातें एक नज़र में।

नेताजी का चश्मा

स्वयं प्रकाश द्वारा रचित कहानी जो सामान्य नागरिकों और बच्चों की देशभक्ति को रेखांकित करती है।

  1. लेखक और साहित्यिक शैली

    स्वयं प्रकाश (1947-2019) मध्यमवर्गीय जीवन और सामाजिक विसंगतियों के महत्वपूर्ण कथाकार हैं।

    • लेखक परिचय — इंदौर में जन्मे, मैकेनिकल इंजीनियर और 'वसुधा' पत्रिका के संपादक रहे।
    • भाषा और शिल्प — रोचक किस्सागोई शैली में 'आइडिया', 'रियल' जैसे अंग्रेजी शब्दों और स्थानीय मुहावरों का प्रयोग।
  2. कस्बा और नेताजी की प्रतिमा

    एक छोटे कस्बे के मुख्य चौराहे पर नगरपालिका द्वारा स्थापित नेताजी की संगमरमर की मूर्ति।

    • मूर्ति की विशेषता — टोपी से कोट के दूसरे बटन तक की 'बस्ट' प्रतिमा, जो फौजी वर्दी में सुंदर लग रही थी।
    • बनावट में कमी — मूर्तिकार मोतीलाल पत्थर का पारदर्शी चश्मा बनाना भूल गया या वह टूट गया था।
  3. कैप्टन चश्मेवाला

    एक बूढ़ा, मरियल और लंगड़ा व्यक्ति जो फेरी लगाकर चश्मे बेचता था और मूर्ति का सम्मान करता था।

    • चश्मा बदलने की प्रक्रिया — ग्राहक द्वारा मूर्ति वाला फ्रेम मांगने पर कैप्टन उसे बदलकर नया फ्रेम लगा देता था।
    • निस्वार्थ देशभक्ति — बिना किसी सैन्य पद के भी नेताजी के प्रति गहरा सम्मान और संवेदना रखना।
  4. पात्रों का दृष्टिकोण

    हालदार साहब और पानवाले के माध्यम से समाज की विभिन्न मानसिकताओं का चित्रण।

    • पानवाले का रेखाचित्र — शुरुआत में कैप्टन का मजाक उड़ाने वाला, लेकिन उसकी मृत्यु पर भावुक होने वाला व्यक्ति।
    • हालदार साहब की चिंता — उस कौम के भविष्य पर दुखी होना जो देशभक्तों का उपहास उड़ाती है।
  5. नई आशा का प्रतीक

    कैप्टन की मृत्यु के बाद बच्चों द्वारा मूर्ति पर लगाया गया सरकंडे का चश्मा।

    • सरकंडे का चश्मा — यह दर्शाता है कि भावी पीढ़ी के मन में भी देश के नायकों के प्रति सम्मान जीवित है।
    • देशप्रेम की व्यापकता — शुक्ल जी के अनुसार देश के मनुष्य, पशु-पक्षी और प्रकृति से लगाव ही वास्तविक प्रेम है।

अध्याय के नोट्स

स्वयं प्रकाश द्वारा लिखित यह कहानी एक कस्बे की नगरपालिका, नेताजी सुभाष चंद्र बोस की प्रतिमा और एक साधारण चश्मेवाले के माध्यम से देशभक्ति के वास्तविक अर्थ को समझाती है।

लेखक परिचय: स्वयं प्रकाश

स्वयं प्रकाश (1947-2019) समकालीन हिंदी कहानी के एक महत्वपूर्ण लेखक हैं, जिन्होंने मध्यमवर्गीय जीवन की विसंगतियों को अपनी रचनाओं में उकेरा है।

स्वयं प्रकाश का जन्म मध्य प्रदेश के इंदौर में हुआ था। उन्होंने मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की और राजस्थान में एक औद्योगिक प्रतिष्ठान में लंबे समय तक कार्यरत रहे। वे 'वसुधा' जैसी प्रतिष्ठित पत्रिका के संपादन से भी जुड़े रहे।

उनकी कहानियों में वर्ग-शोषण के विरुद्ध चेतना और सामाजिक भेदभाव (जाति, संप्रदाय, लिंग) के खिलाफ प्रतिकार का स्वर मिलता है। उनकी शैली रोचक किस्सागोई पर आधारित है, जो हिंदी की वाचिक परंपरा को समृद्ध करती है। 'सूरज कब निकलेगा' और 'आदमी जात का आदमी' उनके प्रमुख कहानी संग्रह हैं।

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NCERT reference: chapter PDF page 1.

कस्बा और नेताजी की प्रतिमा

कहानी एक छोटे से कस्बे की है जहाँ नगरपालिका ने मुख्य चौराहे पर नेताजी सुभाष चंद्र बोस की एक संगमरमर की प्रतिमा लगवाई थी।

कस्बा बहुत बड़ा नहीं था, वहाँ कुछ पक्के मकान, एक बाजार, लड़के-लड़कियों के स्कूल और एक सीमेंट का छोटा कारखाना था। नगरपालिका समय-समय पर छोटे-मोटे विकास कार्य करवाती रहती थी। इसी उत्साह में एक प्रशासनिक अधिकारी ने चौराहे पर नेताजी की प्रतिमा लगवाई।

प्रतिमा संगमरमर की थी और 'बस्ट' (टोपी से कोट के दूसरे बटन तक) के रूप में थी। नेताजी फौजी वर्दी में सुंदर और मासूम लग रहे थे। प्रतिमा को देखते ही 'दिल्ली चलो' जैसे नारे याद आने लगते थे, जो एक सफल कलाकृति की पहचान है।

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नगरपालिका ने कस्बे के विकास के लिए क्या-क्या कार्य किए थे?

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NCERT reference: chapter PDF page 2.

मूर्ति की कमी: चश्मा गायब

प्रतिमा सुंदर थी, लेकिन उसमें एक बड़ी कमी थी—नेताजी की आँखों पर संगमरमर का चश्मा नहीं था।

लेखक अनुमान लगाते हैं कि शायद बजट की कमी या अच्छे मूर्तिकार की जानकारी न होने के कारण स्थानीय ड्राइंग मास्टर 'मोतीलाल' को यह काम सौंपा गया होगा। मूर्तिकार ने महीने भर में मूर्ति तो बना दी, लेकिन वह पत्थर का पारदर्शी चश्मा बनाने में असफल रहा होगा या चश्मा टूट गया होगा।

हालाँकि मूर्ति पर पत्थर का चश्मा नहीं था, लेकिन किसी ने उस पर एक असली, चौड़ा काला फ्रेम वाला चश्मा पहना दिया था। जब हालदार साहब ने पहली बार इसे देखा, तो वे चकित रह गए और उनके चेहरे पर मुस्कान फैल गई कि 'मूर्ति पत्थर की, लेकिन चश्मा रियल'।

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हालदार साहब को मूर्ति में क्या कमी खटकती थी?

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NCERT reference: chapter PDF pages 2, 3, 4.

कैप्टन चश्मेवाला और उसकी भावना

हालदार साहब को पानवाले से पता चला कि यह चश्मा बदलने का काम 'कैप्टन' नाम का एक व्यक्ति करता है।

कैप्टन कोई फौजी या आजाद हिंद फौज का सिपाही नहीं था, बल्कि एक बूढ़ा, मरियल और लंगड़ा व्यक्ति था जो फेरी लगाकर चश्मे बेचता था। उसे नेताजी की बिना चश्मे वाली मूर्ति आहत करती थी, इसलिए वह अपनी दुकान के फ्रेमों में से एक मूर्ति पर फिट कर देता था।

जब कोई ग्राहक वैसा ही फ्रेम मांगता जो मूर्ति पर लगा है, तो कैप्टन नेताजी से क्षमा मांगते हुए वह फ्रेम उतारकर ग्राहक को दे देता और मूर्ति पर नया फ्रेम लगा देता। यह उसकी देशभक्ति का अनोखा तरीका था।

चश्मा बदलने की प्रक्रिया

  1. 1

    संवेदना

    कैप्टन को बिना चश्मे की मूर्ति अधूरी लगती है।

  2. 2

    अर्पण

    वह अपना एक फ्रेम मूर्ति को पहना देता है।

  3. 3

    विनिमय

    ग्राहक द्वारा वही फ्रेम मांगने पर वह उसे उतारकर ग्राहक को देता है।

  4. 4

    प्रतिस्थापन

    वह मूर्ति पर पुनः नया फ्रेम लगा देता है।

कैप्टन की देशभक्ति और उसके छोटे से व्यवसाय का समन्वय।

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प्रश्न

लोग चश्मेवाले को 'कैप्टन' क्यों कहते थे?

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NCERT reference: chapter PDF pages 3, 4.

आगे का अध्याय

नेताजी का चश्मा — बाकी अध्याय मुफ़्त में पढ़ें

  1. Locked: 1. पानवाला: एक रेखाचित्र
  2. Locked: 2. कैप्टन की मृत्यु और सन्नाटा
  3. Locked: 3. सरकंडे का चश्मा: नई उम्मीद
  4. Locked: 4. साहित्यिक विश्लेषण और संदेश

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